सूर्य ग्रहण 2027 और चंद्र ग्रहण 2027: तारीखें, भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक
पंचांगों में 2027 के पाँच ग्रहण दर्ज हैं: दो सूर्य ग्रहण और तीन हल्के उपच्छाया चंद्र ग्रहण, जिनमें से एक सिर्फ़ एक स्रोत में है। यहाँ हर तारीख उसके स्रोत के साथ है, साथ में यह भी कि आसमान में असल में क्या दिखेगा और परंपरा सूतक कब मानती है।

सूर्य ग्रहण 2027 में दो बार लगेगा: 6 फरवरी को वलयाकार (कंकण) सूर्य ग्रहण और 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण, जिसे भारत के ज़्यादातर हिस्सों से सिर्फ़ आंशिक रूप में देखा जा सकेगा। इनके आसपास तीन उपच्छाया चंद्र ग्रहण हैं, जो ग्रहण का सबसे हल्का रूप होते हैं (इनमें से एक सिर्फ़ हमारे एक स्रोत में दर्ज है)। इस लेख में हर तारीख एक जगह है, हर तारीख किस पंचांग से ली गई है यह लिखा है, और सरल शब्दों में समझाया गया है कि "वलयाकार", "आंशिक" और "उपच्छाया" का मतलब छत पर खड़े होकर देखने वाले के लिए क्या है।
यह लेख शहर-वार समय नहीं देता। ग्रहण कब शुरू होगा, कब चरम पर होगा, कब खत्म होगा, सूर्य का कितना हिस्सा ढकेगा और सूतक कब से लगेगा, ये सब हर शहर के लिए अलग होते हैं, और हमने इन्हें जाँचा नहीं है। इनके लिए अपने शहर का समय द्रिक पंचांग पर देखें (वहाँ पहले नई दिल्ली का समय खुलता है, शहर बदलकर अपना चुनें) या अपने घर के पंचांग से मिलान करें।
सूर्य ग्रहण 2027 और चंद्र ग्रहण 2027: एक नज़र में
| तारीख | दिन | ग्रहण | प्रकार | राशि | किस स्रोत में |
|---|---|---|---|---|---|
| 6 फरवरी 2027 | शनिवार | सूर्य ग्रहण | वलयाकार | मकर | पंचांगबोध, द्रिक पंचांग |
| 21 फरवरी 2027 | रविवार | चंद्र ग्रहण | उपच्छाया | हमारे स्रोतों में नहीं | पंचांगबोध, द्रिक पंचांग |
| 18 जुलाई 2027 | रविवार, गुरु पूर्णिमा | चंद्र ग्रहण | उपच्छाया | हमारे स्रोतों में नहीं | सिर्फ़ पंचांगबोध |
| 2 अगस्त 2027 | सोमवार | सूर्य ग्रहण | पूर्ण, भारत से ज़्यादातर आंशिक | कर्क | पंचांगबोध, द्रिक पंचांग |
| 17 अगस्त 2027 | मंगलवार, रक्षा बंधन | चंद्र ग्रहण | उपच्छाया | हमारे स्रोतों में नहीं | पंचांगबोध, द्रिक पंचांग |
तारीखों का पैटर्न देखिए: ग्रहण दो गुच्छों में आते हैं, पहले 6 और 21 फरवरी, फिर 18 जुलाई, 2 अगस्त और 17 अगस्त, और हर गुच्छे के भीतर दो ग्रहणों के बीच लगभग पंद्रह दिन का अंतर है। यह संयोग नहीं है। ग्रहण तभी होता है जब अमावस्या या पूर्णिमा उन दो बिंदुओं के पास पड़े जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है, और सूर्य लगभग हर छह महीने में इन बिंदुओं के पास से गुज़रता है। वैदिक ज्योतिष इन्हीं दो बिंदुओं को राहु और केतु कहता है, और इसीलिए पुराणों की हर ग्रहण कथा में राहु-केतु आते हैं।
वलयाकार, पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया: असल में क्या दिखेगा
कैलेंडर पर लिखा प्रकार उस जगह का होता है जहाँ से ग्रहण सबसे अच्छा दिखता है, ज़रूरी नहीं कि आपके शहर का भी वही हो। ज़मीन से हर प्रकार ऐसा दिखता है:
| प्रकार | क्या होता है | आपको क्या दिखता है | सीधे आँख से देखना सुरक्षित? |
|---|---|---|---|
| पूर्ण सूर्य ग्रहण | चंद्रमा पूरे सूर्य को ढक लेता है | दिन में अंधेरा, पर सिर्फ़ एक पतली पट्टी में | नहीं; केवल पूर्णता के क्षणों में अपवाद है, जो 2027 में भारत को नहीं मिलेगा |
| वलयाकार सूर्य ग्रहण | चंद्रमा दूर होने से सूर्य को पूरा नहीं ढक पाता | रोशनी का एक छल्ला, सिर्फ़ एक पतली पट्टी में | नहीं |
| आंशिक सूर्य ग्रहण | चंद्रमा सूर्य का एक हिस्सा ढकता है | सूर्य जैसे किसी ने एक कोना काट लिया हो; दिन की रोशनी शायद ही बदले | नहीं |
| उपच्छाया चंद्र ग्रहण | चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से गुज़रता है | एक किनारे पर हल्की धूसर छाया, कई लोगों को कुछ पता नहीं चलता | हाँ |
यानी "पूर्ण" ग्रहण सिर्फ़ अपनी पट्टी में पूर्ण होता है। उसके बाहर, कहीं बड़े इलाके में, वही ग्रहण आंशिक दिखता है। 2 अगस्त 2027 को ठीक यही होगा।
2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण: भारत में दिखेगा या नहीं
2 अगस्त का ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण है, लेकिन पूर्णता की पट्टी भारत से बाहर है। भारत के ज़्यादातर हिस्सों से यह आंशिक ग्रहण के रूप में दिखेगा: चंद्रमा कुछ देर सूर्य का एक हिस्सा ढकेगा और फिर हट जाएगा। सूर्य का कितना हिस्सा ढकेगा और कितनी देर, यह आपके शहर पर निर्भर है। हमने ये आँकड़े शहर-वार नहीं जाँचे, इसलिए यहाँ नहीं दे रहे। कुछ जगहों से बहुत कम दिख सकता है, अपना शहर ज़रूर जाँचें।
इस तारीख की कुछ खास बातें:
- यह सावन में पड़ता है। उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत गणना में सावन 2027 19 जुलाई से 17 अगस्त तक है, इसलिए 2 अगस्त सावन का सोमवार भी है। हर सावन सोमवार और ग्रहण वाले दिन व्रत कैसे रखें, यह सावन 2027 लेख में है।
- यह अमावस्या है। हर सूर्य ग्रहण अमावस्या को ही होता है, इसलिए यह दिन उस महीने की अमावस्या भी है।
- सूर्य और चंद्रमा कर्क राशि में होंगे, वही राशि जिसमें 5 दिसंबर 2026 से केतु है। उस दौर की बात राहु-केतु गोचर में है (अंग्रेज़ी में)।
उस दिन बाहर रहने वालों के लिए एक बात: आंशिक सूर्य ग्रहण वही है जिसे लोग सबसे ज़्यादा नंगी आँख से देखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि आसमान सामान्य लगता है। नीचे का आँखों की सुरक्षा वाला हिस्सा पूरा पढ़ें।
6 फरवरी 2027 का वलयाकार सूर्य ग्रहण
साल का पहला ग्रहण वलयाकार है, जिसे पंचांगों में कंकण या वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है, और यह मकर राशि में पड़ता है, जिसमें दिसंबर 2026 से राहु है। "आग का छल्ला" सिर्फ़ एक पतली पट्टी से दिखता है। हमारे स्रोत यह नहीं बताते कि भारत का कोई हिस्सा इसे आंशिक रूप में भी देख पाएगा या नहीं, इसलिए हम अनुमान नहीं लगाएँगे। अगर आपका पंचांग इसे आपके शहर के लिए "दृश्य नहीं" बताता है, तो नीचे दी गई परंपरा के अनुसार आपके लिए सूतक नहीं है।
चंद्र ग्रहण 2027: 21 फरवरी, 18 जुलाई और 17 अगस्त
2027 के तीनों चंद्र ग्रहण उपच्छाया हैं। उपच्छाया ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की गहरी भीतरी छाया में जाता ही नहीं, इसलिए आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा कटा हुआ हिस्सा नहीं दिखता। साफ़ रात में पूर्णिमा के चाँद का एक किनारा थोड़ा फीका लग सकता है, या शायद कुछ भी अलग न दिखे।
- 21 फरवरी (रविवार): पंचांगबोध और द्रिक पंचांग, दोनों में दर्ज।
- 18 जुलाई (रविवार, गुरु पूर्णिमा): सिर्फ़ पंचांगबोध में दर्ज। गुरु पूर्णिमा की पूजा अपने पंचांग के हिसाब से तय करें।
- 17 अगस्त (मंगलवार, रक्षा बंधन): पंचांगबोध और द्रिक पंचांग, दोनों में दर्ज।
कई पंचांगकार उपच्छाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से ग्रहण नहीं मानते, इसलिए उस पर सूतक नहीं लगता और त्योहार सामान्य रूप से मनाया जाता है। रक्षा बंधन पर राखी बाँधने का समय भद्रा जैसे दूसरे नियमों से तय होता है, उपच्छाया ग्रहण से नहीं। हर परिवार की रीति अलग हो सकती है, इसलिए आपके घर में कोई और परंपरा है तो अपने पुरोहित या पंचांग की बात मानें।
ग्रहण 2027 सूतक: परंपरा इसे कब मानती है
सूतक ग्रहण से पहले का वह समय है जिसमें कई परिवार खाना बनाना, खाना, नया काम शुरू करना और मंदिर में पूजा करना टालते हैं। परंपरा की बात तीन हिस्सों में है, और पहला हिस्सा सबसे ज़्यादा भुला दिया जाता है।
- सूतक सिर्फ़ उसी ग्रहण का माना जाता है जो आपके स्थान से दिखे। अगर ग्रहण आपके शहर से दिखाई ही नहीं देता, तो परंपरा वहाँ सूतक नहीं मानती, चाहे खबरों में कुछ भी कहा जाए।
- सूतक की शुरुआत ग्रहण के स्थानीय आरंभ से पीछे गिनी जाती है। पंचांगों में आमतौर पर सूर्य ग्रहण से लगभग बारह घंटे और चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक माना जाता है। ग्रहण हर शहर में अलग समय पर शुरू होता है, इसलिए सूतक का समय भी अलग होता है। हम वह समय नहीं दे रहे; अपने शहर के पंचांग से लें।
- ग्रहण खत्म होने पर सूतक भी खत्म। परंपरा से लोग स्नान करते हैं, घर साफ़ करते हैं और फिर ताज़ा बना भोजन करते हैं।
ग्रहण के समय परिवार आमतौर पर क्या करते हैं: रखे हुए खाने और पानी में तुलसी के पत्ते या कुश डालते हैं, मंत्र जप करते हैं (परंपरा मानती है कि ग्रहण के समय किया गया जप विशेष फल देता है) और ग्रहण के बाद दान करते हैं। कई मंदिरों के कपाट इस दौरान बंद रहते हैं।
सूतक का क्या मतलब नहीं है, यह भी उतना ही ज़रूरी है। परंपरा खुद बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमारों के लिए सूतक के नियम ढीले रखती है। ग्रहण की वजह से भोजन या दवा छोड़ने का कोई चिकित्सकीय कारण नहीं है। गर्भवती महिलाएँ, मधुमेह के मरीज़ या नियमित दवा लेने वाले लोग अपने डॉक्टर की सलाह मानें, उपवास की नहीं। ग्रहण किसी अस्पताल की अपॉइंटमेंट, यात्रा या परीक्षा को रद्द करने की वजह नहीं है।
बिना डर के, सुरक्षित तरीके से ग्रहण देखें
ग्रहण के समय घर से बाहर निकलना नुकसानदेह नहीं है। असली खतरा सिर्फ़ सूर्य को सीधे देखने में है, और वह खतरा हर दिन उतना ही होता है; ग्रहण बस लोगों को ऐसा करने के लिए ललचाता है।
- चंद्र ग्रहण नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है। उपच्छाया की हल्की छाया देखने में दूरबीन मदद करती है।
- आंशिक सूर्य ग्रहण को कभी सीधे न देखें। धूप का चश्मा, धुएँ से काला किया काँच, पुरानी एक्स-रे फ़िल्म और पानी में परछाईं, इनमें से कोई भी आँखों को नहीं बचाता।
- सही सोलर व्यूअर इस्तेमाल करें, जिन पर ISO 12312-2 मानक लिखा हो, या पिनहोल से अप्रत्यक्ष रूप से देखें: कार्ड में किया छोटा-सा छेद सूर्य की छवि कागज़ पर डाल देता है, और रसोई की छलनी के छेद भी यही करते हैं।
- कैमरा, ज़ूम किया हुआ फ़ोन, दूरबीन और टेलीस्कोप के आगे सही सोलर फ़िल्टर लगा होना चाहिए। बिना फ़िल्टर इनसे सूर्य देखने पर आँखों को जल्दी नुकसान हो सकता है।
- बच्चों पर नज़र रखें, वे बिना सोचे ऊपर देख लेते हैं।
आपकी चंद्र राशि से ग्रहण किस भाव में
ज्योतिषी परंपरागत रूप से ग्रहण को आपकी चंद्र राशि से उस राशि तक गिनकर पढ़ते हैं जिसमें ग्रहण पड़ता है। नीचे की तालिका उन दो सूर्य ग्रहणों के लिए यही गिनती है जिनकी राशि हमारे स्रोत बताते हैं। यह सिर्फ़ गिनती है, भविष्यवाणी नहीं। अपनी चंद्र राशि नहीं पता तो मुफ़्त कुंडली बनाकर देखें।
| आपकी चंद्र राशि | 6 फरवरी (मकर) | 2 अगस्त (कर्क) |
|---|---|---|
| मेष | 10वाँ | 4था |
| वृषभ | 9वाँ | 3रा |
| मिथुन | 8वाँ | 2रा |
| कर्क | 7वाँ | 1ला |
| सिंह | 6ठा | 12वाँ |
| कन्या | 5वाँ | 11वाँ |
| तुला | 4था | 10वाँ |
| वृश्चिक | 3रा | 9वाँ |
| धनु | 2रा | 8वाँ |
| मकर | 1ला | 7वाँ |
| कुंभ | 12वाँ | 6ठा |
| मीन | 11वाँ | 5वाँ |
दोनों ग्रहण आमने-सामने की राशियों में हैं, इसलिए हर राशि के लिए वे आमने-सामने के भावों में पड़ते हैं, जैसे घर और करियर, या खुद और साझेदारी। पराशर परंपरा में भाव बताता है कि ग्रहण जीवन के किस क्षेत्र पर ध्यान खींचता है: पहला स्वयं और स्वास्थ्य, दूसरा परिवार और बचत, तीसरा प्रयास और भाई-बहन, चौथा घर और माँ, पाँचवाँ संतान और पढ़ाई, छठा रोज़ का काम और विवाद, सातवाँ विवाह और साझेदार, आठवाँ अचानक बदलाव और शोध, नौवाँ भाग्य और गुरु, दसवाँ करियर, ग्यारहवाँ लाभ और मित्र, बारहवाँ खर्च और विश्राम।
एक उदाहरण (सिर्फ़ समझाने के लिए): मान लीजिए किसी की चंद्र राशि तुला है। तुला से गिनें तो कर्क दसवीं राशि है, इसलिए 2 अगस्त का ग्रहण उसके दसवें भाव, यानी करियर के भाव में पड़ता है। इसका मतलब नौकरी जाना नहीं है। ज्योतिषी इसे बस इतना पढ़ते हैं कि उस समय काम से जुड़ी बातें मन में ज़्यादा रह सकती हैं, और फिर देखते हैं कि उस व्यक्ति की अपनी कुंडली में कर्क राशि के पास कोई ग्रह है या नहीं।
किसी भाव पर ग्रहण पड़ना अपशकुन नहीं है। ज्योतिषी सिर्फ़ चंद्र राशि से ग्रहण का फल नहीं बताते; वे देखते हैं कि ग्रहण आपकी जन्म कुंडली के किसी ग्रह के पास पड़ रहा है या नहीं, और आपकी कौन-सी दशा चल रही है। साल के बड़े और धीमे बदलावों के लिए राशिफल 2027 में बारहों राशियों का हाल है, और रोज़ का हाल राशिफल पेज पर।
अपने शहर के लिए ग्रहण कैसे जाँचें
- अपने पंचांग का 2027 ग्रहण पेज खोलें और अपना शहर चुनें। द्रिक पंचांग पहले नई दिल्ली दिखाता है, उसे बदलें।
- देखें कि ग्रहण आपके शहर से दृश्य बताया गया है या नहीं। अगर नहीं, तो परंपरा के अनुसार वहाँ सूतक नहीं है।
- अगर दृश्य है, तो आरंभ, चरम और समाप्ति का समय और पंचांग में दिया सूतक का समय लिख लें।
- Astroliya पर त्योहार कैलेंडर आने वाले महीनों की आकाशीय घटनाओं में ग्रहण दिखाता है, साथ में यह भी कि चुने गए स्थान से वह दिखेगा या नहीं, और पंचांग आपके स्थान के लिए दिन की तिथि और नक्षत्र दिखाता है।
- अपनी कुंडली के हिसाब से पढ़ना हो तो Astroliya के AI ज्योतिषी से पूछें, जो आपकी कुंडली की गणना के आधार पर जवाब देता है और साफ़ बताता है कि वह AI है।
यही जानकारी अंग्रेज़ी में Eclipses 2027 पर है।
लोग ये सवाल पूछते हैं
क्या 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा?
हाँ, भारत के ज़्यादातर हिस्सों से, लेकिन सिर्फ़ आंशिक ग्रहण के रूप में; पूर्णता भारत के बाहर होगी। सूर्य का कितना हिस्सा ढकेगा और किस समय, यह आपके शहर पर निर्भर है, इसलिए उस दिन से पहले द्रिक पंचांग या अपने पंचांग पर अपना शहर चुनकर देखें।
क्या उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक लगता है?
कई पंचांगकार उपच्छाया चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से ग्रहण नहीं मानते, इसलिए सूतक नहीं रखा जाता। 2027 के तीनों चंद्र ग्रहण उपच्छाया हैं। आपके परिवार की रीति अलग हो तो अपने पुरोहित या पंचांग की बात मानें।
क्या गुरु पूर्णिमा, 18 जुलाई 2027 को चंद्र ग्रहण है?
पंचांगबोध उस दिन उपच्छाया चंद्र ग्रहण बताता है, जबकि द्रिक पंचांग के 2027 कैलेंडर में यह नहीं है। जहाँ दर्ज है, वहाँ भी यह उपच्छाया ही है, यानी बहुत हल्का और आमतौर पर बिना सूतक के। गुरु पूर्णिमा की योजना अपने पंचांग के हिसाब से बनाएँ।
क्या आंशिक सूर्य ग्रहण धूप के चश्मे से देख सकते हैं?
नहीं। साधारण धूप का चश्मा कितना भी गहरा हो, पर्याप्त रोशनी नहीं रोकता। ISO 12312-2 मानक वाले सोलर व्यूअर इस्तेमाल करें, या पिनहोल से कागज़ पर पड़ी सूर्य की छवि देखें।
क्या ग्रहण के आसपास नया काम शुरू नहीं करना चाहिए?
कई परिवार सूतक और ग्रहण के दौरान नया काम, संस्कार या खरीदारी शुरू करने से बचते हैं, और मुहूर्त निकालने वाले आमतौर पर ग्रहण के दिन छोड़ देते हैं। यह परंपरा की पसंद है, नतीजों का कोई नियम नहीं। नौकरी, यात्रा, परीक्षा और इलाज जैसे ज़रूरी काम बदलने की ज़रूरत नहीं है।
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