सावन 2027: कब से कब तक, सभी सावन सोमवार और व्रत की विधि

सावन 2027 की तारीख इस पर निर्भर करती है कि आपका परिवार कौन-सा पंचांग मानता है। उत्तर भारत में सावन 19 जुलाई से शुरू होकर पाँच सोमवार देता है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में यह 3 अगस्त से शुरू होता है। यहाँ दोनों सूचियाँ, 2 अगस्त के ग्रहण की बात और व्रत-पूजा का पारंपरिक तरीका है।

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भीगे हुए खुले मंदिर में पत्थर का शिवलिंग, बेलपत्र और गेंदे के फूलों का चढ़ावा, पास में त्रिशूल
Photo: Beyond India by Shubham Thakur / Pexels

सावन 2027 उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार सोमवार, 19 जुलाई 2027 से शुरू होकर मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को रक्षा बंधन के दिन पूरा होता है। इस बार सावन की शुरुआत ही सोमवार से हो रही है, इसलिए पहला सावन सोमवार पहले ही दिन पड़ता है और पूरे महीने में पाँच सोमवार आते हैं। लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा में जो अमांत पंचांग चलता है, उसमें श्रावण मास 3 अगस्त से शुरू होता है और सोमवार भी अलग बनते हैं। नीचे दोनों पंचांगों की तारीखें, उनके अलग होने की वजह, 2 अगस्त के सूर्य ग्रहण की बात और सोमवार व्रत व शिव पूजा का पारंपरिक तरीका दिया गया है।

सावन 2027 कब से कब तक: दोनों पंचांग एक साथ

हिंदू महीना चंद्रमा से गिना जाता है, पर महीना कहाँ से शुरू हो, इस पर दो परंपराएँ हैं। पूर्णिमांत पंचांग में महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है, यानी सावन गुरु पूर्णिमा (18 जुलाई 2027) के अगले दिन से शुरू होता है। अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर खत्म होता है, इसलिए वहाँ श्रावण मास अमावस्या के अगले दिन से शुरू होता है।

पंचांगकहाँ माना जाता हैसावन शुरूसावन खत्म
पूर्णिमांतउत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़सोमवार, 19 जुलाई 2027मंगलवार, 17 अगस्त 2027
अमांतमहाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगानामंगलवार, 3 अगस्त 2027मंगलवार, 31 अगस्त 2027

दोनों में से कोई भी गलत नहीं है। श्रावण मास 2027 का शुक्ल पक्ष, यानी 3 से 17 अगस्त, दोनों पंचांगों में एक ही है। फर्क केवल कृष्ण पक्ष का है: उत्तर भारत में वह सावन से पहले आता है, जबकि अमांत पंचांग में वह सावन के बाद आता है। इसीलिए एक ही परिवार के दो घरों में सावन अलग-अलग दिन शुरू हो सकता है। तमिलनाडु, केरल, कुछ पहाड़ी इलाकों और नेपाल में सौर पंचांग भी चलता है, जिसकी तारीखें इन दोनों से थोड़ी अलग होती हैं; वहाँ के लोग अपना स्थानीय पंचांग देखें।

सावन सोमवार 2027 की पूरी सूची

सोमवारपूर्णिमांत (उत्तर भारत)अमांत (पश्चिम और दक्षिण भारत)
19 जुलाई 2027पहला सावन सोमवार-
26 जुलाई 2027दूसरा सावन सोमवार-
2 अगस्त 2027तीसरा सावन सोमवार (सूर्य ग्रहण का दिन)-
9 अगस्त 2027चौथा सावन सोमवारपहला श्रावण सोमवार
16 अगस्त 2027पाँचवाँ सावन सोमवारदूसरा श्रावण सोमवार
23 अगस्त 2027-तीसरा श्रावण सोमवार
30 अगस्त 2027-चौथा श्रावण सोमवार

सावन सोमवार 2027 में उत्तर भारत को पाँच और अमांत पंचांग वालों को चार सोमवार मिलते हैं। 9 और 16 अगस्त दोनों सूचियों में हैं।

एक उदाहरण (केवल समझाने के लिए)

मान लीजिए किसी लड़की का मायका पुणे में है, जहाँ अमांत पंचांग चलता है, और ससुराल लखनऊ में, जहाँ पूर्णिमांत। लखनऊ में सास 19 जुलाई से सोमवार का व्रत शुरू करेंगी, जबकि पुणे में माँ 9 अगस्त से। अगर दोनों घर साथ में व्रत रखना चाहें, तो 9 और 16 अगस्त वे दो सोमवार हैं जो दोनों पंचांगों में सावन के हैं। परंपरा में आम तौर पर वही पंचांग माना जाता है जो आपके घर या कुल में चलता आया है, इसलिए इसमें किसी एक को सही ठहराने की ज़रूरत नहीं है।

2 अगस्त 2027: सावन सोमवार और सूर्य ग्रहण एक ही दिन

पूर्णिमांत पंचांग में तीसरा सावन सोमवार, 2 अगस्त 2027, सूर्य ग्रहण का दिन भी है। यह खगोलीय रूप से पूर्ण सूर्य ग्रहण है, लेकिन पूर्णता की पट्टी भारत से बाहर है; भारत के अधिकांश हिस्सों से यह आंशिक ग्रहण के रूप में दिखेगा। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या पर होता है, और यही अमावस्या उत्तर भारत में सावन के कृष्ण पक्ष का अंत है। इसी के अगले दिन, 3 अगस्त से, अमांत पंचांग में श्रावण मास शुरू होता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को परंपरा में सोमवती अमावस्या कहा जाता है; सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि है या नहीं, यह अपने शहर के पंचांग में देख लें।

इस दिन व्रत रखने वालों के मन में अक्सर दो सवाल आते हैं:

  • क्या ग्रहण के कारण सोमवार का व्रत छोड़ना चाहिए? परंपरा में ऐसा कोई नियम नहीं बताया जाता। बहुत से परिवार ग्रहण के समय मूर्ति-स्पर्श और भोजन से बचते हैं, पर मन में जाप करते रहते हैं, और ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके पूजा करते हैं।
  • सूतक कब से माना जाए? परंपरा में सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से लगभग बारह घंटे पहले से माना जाता है, और वह भी केवल उन जगहों पर जहाँ ग्रहण दिखाई दे। आपके शहर में ग्रहण कब शुरू होगा और दिखेगा या नहीं, यह स्थान पर निर्भर है।

ग्रहण की पूरी जानकारी, 2027 के बाकी ग्रहणों के साथ, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण 2027 वाले लेख में है। ग्रहण कोई अपशकुन नहीं है जिससे डरा जाए; यह एक नियमित खगोलीय घटना है, जिसके आसपास कुछ धार्मिक नियम परंपरा से चले आए हैं।

सावन सोमवार व्रत की विधि

व्रत का तरीका हर क्षेत्र और परिवार में थोड़ा अलग होता है। नीचे वह क्रम है जो आम तौर पर अपनाया जाता है; इसमें से जितना आपके लिए सहज हो, उतना ही करें।

  1. संकल्प: सोमवार की सुबह स्नान के बाद मन में या शब्दों में तय करें कि आज का व्रत किस भाव से रख रहे हैं। जो पूरे सावन के सोमवार रखना चाहते हैं, वे पहले सोमवार को ही यह संकल्प लेते हैं।
  2. अभिषेक: शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। कई लोग दूध, दही, शहद या गंगाजल भी चढ़ाते हैं। घर में शिवलिंग न हो तो पास के मंदिर में या शिव जी के चित्र के सामने जल अर्पित करना भी परंपरा में स्वीकार्य माना जाता है।
  3. अर्पण: बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला, बिना कटा-फटा), धतूरा, आक के फूल, सफ़ेद फूल, चंदन और अक्षत चढ़ाए जाते हैं। शिव पूजा में हल्दी और केतकी का फूल परंपरा में नहीं चढ़ाया जाता।
  4. जाप और पाठ: "ॐ नमः शिवाय" का जाप, शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ, और सावन सोमवार व्रत कथा सुनना आम है।
  5. उपवास: कुछ लोग निर्जल रहते हैं, कुछ फलाहार करते हैं, और कुछ शाम की पूजा के बाद एक बार सात्त्विक भोजन करते हैं। अनाज, प्याज़-लहसुन और मांसाहार से आम तौर पर परहेज़ किया जाता है।
  6. शाम की पूजा और पारण: प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास दीपक जलाकर आरती की जाती है, फिर व्रत खोला जाता है।

सावन के मंगलवार को कई विवाहित स्त्रियाँ मंगला गौरी व्रत भी रखती हैं, और उत्तर भारत में कई जगह कांवड़ यात्रा निकलती है। ये परंपराएँ सोमवार व्रत से अलग हैं और अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार निभाई जाती हैं।

व्रत रखने से क्या होता है, और क्या नहीं

शास्त्रों और लोक परंपरा में सावन को शिव का प्रिय महीना कहा गया है, और सोमवार व्रत को मन की इच्छा, अच्छे जीवनसाथी या घर की शांति के लिए रखा जाता है। इसे श्रद्धा और अनुशासन के अभ्यास की तरह देखना ज़्यादा ईमानदार है: एक महीने तक हर हफ़्ते एक दिन संयम, जाप और ध्यान। व्रत कोई सौदा नहीं है जिसमें तय नतीजा मिले, और व्रत छूट जाने से कोई अनिष्ट नहीं होता। अगर किसी सोमवार व्रत न रख पाएँ, तो परंपरा में अगले सोमवार से फिर शुरू करने की बात कही जाती है।

शिव पूजा, जाप और रुद्राक्ष की माला

सावन में बहुत से लोग रोज़ "ॐ नमः शिवाय" की एक या अधिक माला जपते हैं। माला का काम गिनती रखना है, ताकि मन संख्या में न अटके और जाप पर टिका रहे। 108 मनकों की माला पर एक चक्कर एक माला कहलाता है; बीच का अलग मनका, जिसे सुमेरु या गुरु मनका कहते हैं, लांघा नहीं जाता, वहाँ से माला पलटकर फिर शुरू की जाती है।

शिव पूजा में रुद्राक्ष की माला परंपरा से जुड़ी है, और 5 मुखी रुद्राक्ष सबसे आम माना जाता है। वह किसके लिए है और कैसे पहना जाता है, यह 5 मुखी रुद्राक्ष के फायदे वाले लेख में विस्तार से है। अगर आप सावन के जाप के लिए माला ढूँढ रहे हैं, तो Astroliya स्टोर पर रुद्राक्ष मालाएँ हैं, जिनमें 108 और 108+1 मनकों वाली मालाएँ शामिल हैं। माला न हो तो भी जाप उतना ही किया जा सकता है; उँगलियों पर गिनना भी परंपरा में मान्य है। माला बीमारी दूर करने या इच्छा पूरी करने का वादा नहीं है, यह ध्यान टिकाने का एक साधन है।

अपने शहर के लिए सही दिन कैसे तय करें

  1. पहले तय करें कि आपके घर में पूर्णिमांत चलता है या अमांत। शक हो तो घर के बड़ों से या स्थानीय मंदिर के पंचांग से पूछें।
  2. ऊपर की तालिका से अपने सोमवार चुनें।
  3. Astroliya पंचांग में साइन इन करके अपना शहर चुनें और उस दिन का सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि देखें। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय है, इसलिए शाम की पूजा सूर्यास्त के समय के हिसाब से रखें।
  4. 2 अगस्त को व्रत रख रहे हैं, तो अपने शहर में ग्रहण दिखेगा या नहीं और कब, यह किसी भरोसेमंद स्थानीय पंचांग में देखें और पूजा उसके हिसाब से रखें।

सावन के साथ आने वाले दूसरे त्योहारों की सूची त्योहार पेज पर है। यही जानकारी अंग्रेज़ी में Sawan 2027 लेख में पढ़ी जा सकती है।

लोग ये सवाल पूछते हैं

सावन 2027 में कितने सोमवार हैं?

पूर्णिमांत पंचांग में पाँच: 19 जुलाई, 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त और 16 अगस्त। अमांत पंचांग में चार: 9, 16, 23 और 30 अगस्त। यह नई दिल्ली की गणना पर आधारित सूची है।

पहला सावन सोमवार 2027 कब है?

उत्तर भारत में 19 जुलाई 2027, जो सावन का पहला ही दिन है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में पहला श्रावण सोमवार 9 अगस्त 2027 को है।

क्या सूर्य ग्रहण वाले सोमवार को व्रत रख सकते हैं?

हाँ, परंपरा में ग्रहण के कारण व्रत छोड़ने का नियम नहीं बताया जाता। लोग ग्रहण के समय पूजा-पाठ रोककर मन में जाप करते हैं और ग्रहण के बाद स्नान करके पूजा करते हैं। सूतक केवल वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखे।

उत्तर और दक्षिण भारत में सावन अलग क्यों होता है?

क्योंकि उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है और पश्चिम-दक्षिण भारत में अमावस्या पर। श्रावण का शुक्ल पक्ष दोनों में एक ही है, केवल कृष्ण पक्ष आगे-पीछे गिना जाता है, इसलिए शुरुआत में करीब पंद्रह दिन का फर्क दिखता है।

क्या सावन के व्रत के लिए रुद्राक्ष पहनना ज़रूरी है?

नहीं। रुद्राक्ष परंपरा से शिव पूजा से जुड़ा है, पर व्रत या जाप के लिए यह ज़रूरी नहीं है। जाप उँगलियों पर भी गिना जा सकता है।